Tuesday, 20 June 2023

Career option after 10/12th

 


Here is the list of career options after the 12th.

List of Career Options After 12th in Humanities

Humanities or Arts is a perfect option for those who want to deeply invest in the world of social science. You will have an endless list of career options after completing your school education. Given below are some emerging career options after 12th Arts.

Here are the top career options after 12th Arts.

Mass Communication and Journalism

It is one of the most lucrative career options of contemporary times. There is a wide range of Mass communication courses after 12th offered by top-notch universities. It involves subjects like Print Media, Electronic Media, Radio Journalism, Advertising, Animation, Web Designing, Media Research, Digital Media and many more. Moreover, they are various types of mass media. All these subjects are multidisciplinary in nature with immense scope. The field of Print and Electronic media has gained massive popularity in India over the years. Almost every household is subscribed to newspapers or television channels which are the real source of information dissemination. Mass communication is not only now confined to the traditional way of information sharing, but with the advent of the internet, Digital Media has gained immense popularity. It has become a major industry for job recruitment in the country. Some of the lucrative job opportunities in this field include: 

  • Anchor
  • News Reporter
  • Professor
  • Writer 
  • Video Editor
  • TV Producer
  • Radio Producer
  • Photojournalist

Journalism vs Mass Communication, which is a better course?

Law

Again one of the most sought-after career options after 12th is Law or Legal studies. There are top-notch Law courses based on leading universities and colleges around the world. It offers multidisciplinary subjects with a remarkable scope. Also, there are different specializations available for candidates to choose from like Labour LawCommercial Law, Business Law, Corporate Law, Criminal Law, Cyber Law and Environment Law. A professional degree in this discipline can take your career to the next level. Some of the core job profiles in law include:

  • Judges 
  • Litigators
  • Corporate Lawyers
  • Compliance Analyst
  • Arbitrator
  • Lawyer 
  • Law Researcher 
  • Professor 

The Science stream is considered the toughest stream in class 12th. It is a lucrative field of study with immense career options like MBBS. Engineering, Dentistry, Architecture and many more. Moreover, the field of Science and Technology has gained immense popularity as you can fetch high-salary courses after 12th Science. Let’s have a look at some of the promising career options after 12th in the Science stream:

Sound EngineeringBiotechnologyCareer in Aviation
OceanographyBiochemistryForensic Science
Cell TherapyGenetic EngineeringPaediatrics

Medicine

MBBS is a popular course opted for by students who enjoy studying Biology. It is mandatory to have Biology in class 12th to pursue this course. The course duration of MBBS is 5 years which includes internships along with academic and hospital training. You can also explore study abroad options for pursuing MD. 

Engineering

Yet, again promising career which has truly revolutionized the entire world is Engineering. It is considered as one of the most prolific job opportunities of the 21st century with its various multidisciplinary courses. Engineering has become one of the most promising career options after the 12th standard. Some of the popular Engineering courses are:

Have a look at Career Options after 12th Science PCM Other than Engineering!

The Commerce field offers some of the highest-paying career options to students. Ranging from BBA, BCom, and BA Economics at UG level to MBA,  MIM, MIS and PGDM at PG level. Multidisciplinary courses like B.Com or BBA to Integrated Law programme are considered as the highest salary jobs for commerce students. Let’s take a look at the popular career options you can expect in the Commerce stream; 

Corporate EntrepreneurshipFinancial MarketsStrategic Management
Organisational BehaviourCorporate CommunicationMaterial Management
Managerial EconomicsEngineering ManagementFinancial Management

Friday, 16 June 2023

जीवन जीने के उपयोगी नुस्खे

 




व्यायाम और मन की शांति

यह साल का वह समय है जब नमी और तापमान वायरल रोग के प्रसार में सहायक होते हैं। हर कोई फ्लू से पीड़ित दिखाई पड़ता है। तो क्या आपने खुद को घर के अंदर बंद कर लिया है या वायरल संक्रमण के डर से आपने अपनी सांस रोक रखी है। अब आराम से सांस लीजिये। अपने शरीर की प्रतिरक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए कपालभाति, वातक्रम कपालभाति, धनुरासन, मंडूकासन, पवनमुक्तासन, अग्निसार क्रिया, भस्त्रिका प्राणायाम और अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास करें। योग तनाव के हार्मोंस को कम करने में मदद करता है, फेफड़ा और श्वसन तंत्र को बेहतर बनाता है, शरीर को विषयुक्त बनाता है और शरीर के सर्वोत्कृष्ट कार्य को सुनिश्चित करने के लिए ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर में वापस लाता है। 






उपयोगी टिप्स

·  घर से बाहर निकलने से पहले अपनी उंगलियों की मदद से नाक के दोनों छिद्रों में थोड़ा सरसों का तेल डाल लें।

·  फल और सब्जियों को खाने से पहले उसे अच्छी तरह से धो लें।

·  तली हुई या खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों को खाने से परहेज करें।

·  उन भोजनों को ग्रहण करें जिसमें विटामिन बी और सी होता है (हरी सब्जियां और खट्टे फल)

·  भीड़-भाड़ वाली जगह पर ना जायें क्योंकि ज्यादातर वायरल का संक्रमण सांस लेने, दूषित पानी पीने या भोजन खाने और ऐसे लोगों के संपर्क में आने से होता है।

·  अपने कपड़े या प्रसाधन का सामान किसी और के साथ साझा ना करें।

·  ध्यान रखें कि आपका पेट खाली रहे और आपको कब्ज की शिकायत ना हो।

·  हर रोज कम-से-कम 10 से 12 ग्लास पानी पियें।

·  इस मौसम के दौरान कोई भी गरिष्ट आहार योजना ना बनाएं।

·  एंटीबॉयोटिक लेने में शीघ्रता ना करें। सर्दी जैसी आम बीमारी में वह पूरी तरह से अप्रभावी है। यह भी हो सकता है कि एंटीबॉयोटिक रोगी के शरीर में बैक्टिरिया को रोकने में मदद करे।

·  आम सर्दी खुद तक की सीमित रहती है। आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली इससे निपटने में आपकी मदद करती है।

·  व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। जूतों को घर से बाहर उतारकर रखने की कोशिश करें और घर की चीजों को छूने से पहले हाथ अच्छी तरह से धो लें।

·  हर्बल चाय जैसे कैमोमाइल, नींबू या अदरख वायरल संक्रमण को कुछ हद तक शांत कर सकते हैं, जिससे रोगी को बहुत आराम पहुंचता है।

·  वायरल संक्रमण आपकी पाचन प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है, इसलिये खाना को ठीक से चबा कर खायें। याद रखें कि कार्बोहाईड्रेट का पाचन (स्टार्च, शर्करा) आपके मुंह में लार और एंजाइमों के साथ शुरु होता है।

·  सांस लेने और सांस छोड़ने में एक लयबद्ध पैटर्न अपनाएं। सांस लेने का समय सांस छोड़ने के समय के बराबर होना चाहिए। और यह बात भी याद रखें कि श्वसन के दौरान आपका फेफड़ा फैलना चाहिए कि आपका पेट।

 

 

 

 


हर कोई अधिक से अधिक समय चाहता है। किसी को सोने के लिए अधिक वक्त चाहिए तो किसी को व्यायाम करने के लिए, किसी को समाजिक होने के लिए तो किसी को यात्रा के लिए, किसी को रचनात्मक कार्य के लिए तो किसी को लोगों की मदद करने या पर्यावरण बचाने संबंधी कामों के लिए। इसकी सूची बहुत लंबी है। ध्यान समय प्रबंधन में हमारी मदद कर सकता है। भले ही पहली बार इस बात पर विश्वास करना कठिन है लेकिन आप ध्यान की मदद से अपने दिन के हर मिनट का हिसाब रखने में सक्षम हो सकते हैं। इसके लिए पूरे दिन में से केवल शांति के पांच मिनट चाहिए। ऐसा करने परमेरे पास समय नहीं हैकी आपकी सोचमैं प्यार और समय का असीमित स्रोत हूंमें बदल जायेगी।

जब आप सुबह बिस्तर से उठते हैं, तैयार होते हैं, बच्चों को खाना खिलाते हैं, कुत्ता को बाहर घुमाने ले जाते हैं और पूरे दिन ऐसी कई जिम्मेदारियां निभाते हैं, तो ऐसे में शांति और केन्द्रिता की अवस्था को पाना असंभव लगता है। 


लेकिन खुद का खयाल रखने के लिए शांति में पांच मिनट बैठना अपने दांतों में ब्रश करने के समान है। यह छोटा सा काम भी आप दिन में कम से कम दो बार करते हैं। है ना? मैंने दादाजी को कहते सुना है, “तुम अपने बालों में शैंपू करते हो। फिर अपने मन को साफ रखने के लिए तुम रोज ध्यान से इसकी शैंपू क्यों नहीं करते?”

क्या आपको आज की कॉफी के लिए अपने दोस्त से मिलने में रुचि होती है, अपने सहयोगी को समय पर मेल करते हैं, दिन खत्म होने से पहले परिवार के किसी छोटे सदस्य के साथ गेंदों से खेलते हैं? फिर आपको शांति से पांच मिनट बैठने के लिए भी एक जगह तलाशनी चाहिए। यह जरूरी नहीं कि वह जगह शांतिपूर्ण हो। वास्तविकता तो यह है कि मन की शांति के अभ्यास के लिए कभी-कभी शोर भी सहयोगी होता है। इसलिये अपने फोन पर पांच मिनट का टाईमर सेट कर बैठ जायें और इस ध्यान के अभ्यास की शुरुआत करें। दोनों पैरों को क्रॉस करते हुए आराम से फर्श पर बैठ जायें और अपने दोनों हाथों को अपनी जांघों पर रख लें। अपनी केहुनी को मोड़ें और उसे अपने कमर के करीब लेकर आएं। अपनी आंखों को बंद कर लें या उसे खुला भी रकह सकते हैं। फिर सामने की फर्श को 6 फीट से लेकर 10 फीट तक की दूरी तक टकटकी लगाकर देखें। अपनी ठोड़ी को फर्श के समानांतर रखें। अपने दोनों जबड़ों के बीच दूरी बनायें और अपने पेट को नरम रखें। अपने आस-पास की आवाजों पर ध्यान दें। अगर आप घर के भीतर हैं, तो भी आप प्रकृति को सुन सकते हैं। संभव है कि आपको चिड़ियां के गाने की आवाज सुनाई दे या हवा के झोकों से टहनियों या पत्तों के सरसराने की। अगर आप प्रकृति की इस आवाज को नहीं सुन पा रहे हैं तो आप अपने पैरों और कूल्हों के माध्यम से पृथ्वी की लय को महसूस कर सकते हैं। अगर आपके आस-पास कोई टेलीविजन देख रहा हो तो उसकी आवाज से दूर जाने के बजाय उसे भी ध्यान से सुनें। अब धीरे-धीरे सारी चीजों पर से अपना ध्यान हटाएं और अपनी श्वसन प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करें। हर सांस के बाद अपने दिमाग में आने वाली विचारों पर ध्यान दें। महसूस करें कि किस तरह आपकी सांसे चल रही है। अपनी सांस के सामान्य होने तक इस प्रक्रिया को जारी रखें। जब आप अपनी सोच और एहसास के बीच और अधिक जगह बना लेंगे, तब आप खुद की असीमिता से खुद को जोड़ लेंगे। यह आपके मन का वह हिस्सा होगा जो शक्तिशाली और शांत होगा। यह आपके अस्तित्व की उच्च अवस्था होगी जो असीमित क्षमताएं लिए होगी। आप इस अवस्था में बैठने का आनंद उठाने लगेंगे और मन के उच्चता से जुड़े इस अदभुत संबंध को बनाये रखना चाहेंगे। अच्छी खबर यह है कि आप अपनी सांसो के लहरों पर अपने मन को तैरने की अनुमति देकर इस अवस्था से जुड़े रह सकते हैं। शीघ्र ही आपके फोन का अलार्म बज उठेगा। लेकिन अगली बार आप इस ध्यान को और लंबे समय तक करना चाहेंगे। उठने से पहले तीन बार गहरी सांस लें और सांस छोड़ते समय धरती को आधार के रूप में महसूस करें।

रोजाना पांच मिनट का ध्यान कर आप अपने दिमाग को थोड़ा धीमा करने का अभ्यास करते हैं। ऐसा करने से आपकी इंद्रियां मजबूत होती हैं। गुस्सैल और तीव्रतापन के बजाय आपकी तंत्रिका तंत्र शांति के साथ चीजों पर विचार करने लगती है। आप दयालु, होशियार और बुद्धिजीवी इंसान बन जाते हैं, जो स्वयं के साथ और प्रकृति के साथ आसानी से खुद को जोड़ लेता है। मन की शांति आपके विवेक, इरादों और विचारों को स्पष्टता देती है और अपनी जरूरत और दूसरों की जरूरत के बीच संतुलन बनाये रखने में सहयोग करती है। लगातार ध्यान करने पर आपकी चेतना में एक संतुष्टीजनक वृद्धि होगी जो आपको अगली बार आपको और अधिक प्रतिबद्धता के साथ बैठने के लिए प्रेरित करेगी।

 

 

 

 

 

मन की पूरी अवधारणा इसके चार कार्यों पर आधारित होती है और वह है मानस, बुद्धि, चित्त और अहंकार। ये चारों कार्य मन को समझ और चेतना प्रदान करते हैं। इसके अलावा मन हमेशा से कल्पना करने वाला, तर्कसंगत, भावुक और मनोवैज्ञानिक रहा है।

मस्तिष्क या मन के चार प्रकार

1. सक्रिय दिमाग: योग कहता है कि पहले प्रकार का मनक्रियाशीलहै जबकि मनोवैज्ञानिक इसे सक्रिय मन कहते हैं। क्रियाशील मन सक्रिय और बहिर्मुखी होता है। एक गतिशील मन बड़ी मुश्किल से खुद को शांत या स्थिर रख पाता है। बच्चों का मन गतिशील होता है। उनका मन बंटा हुआ या अलग-अलग दिशाओं में सोचने वाला नहीं होता है। लेकिन भटका हुआ मन या हर समय बदलने वाला मन गतिशील या सक्रिय मन से अलग होता है। सक्रिय मन अगर एक विषय पर अपना ध्यान केंद्रित कर ले तो वो चेतनात्मक या अचेतनीय रूप से उसी का अनुसरण करता रहता है। वयस्कों में जब सक्रिय मन प्रबल होता है तो वह व्यक्ति बहिर्मुखी स्वभाव का होता है और परिवार, समाज और पेशेवर लोगों के साथ अधिक मिलनसार हो जाता है। ऐसे व्यक्ति हर उस काम में रूचि दिखाते हैं जो समाज और दूसरे लोगों को उसके करीब लाएगी। 


सक्रिय मस्तिष्क वाला व्यक्ति बहुत ही सामाजिक और व्यवहारिक होता है।

2. सचेत या तार्किक दिमाग: दूसरे प्रकार का दिमाग बुद्धिजीवी मन है जिसे मनोवैज्ञानिक बौद्धिक, तार्किक, सचेत, गणितज्ञ और वैज्ञानिक दिमाग भी कहते हैं। इस तरह का दिमाग ऐसे लोगों में प्रबल होता है जो खोज या जांच करते हैं, सिद्धांतो को जन्म देते हैं या सूत्रों को विकसित करते हैं। ऐसा दिमाग वैज्ञानिकों का होता है। दार्शनिकों और ज्ञानी लोगों का दिमाग भी बौद्धिक होता है। जब बुद्धिजीवियों के लिए बाहर के वातावरण से खुद को जोड़ना मुश्किल होता है। ऐसे लोग एकांत में रहना पसंद करते हैं। वो सोचना, विश्लेषण करना और समस्याओं का हल ढ़ूंढ़ना पसंद करते हैं।

3. भावुक मन: तीसरे प्रकार का मन भाविक मन होता है जिसमें भाव, भावनाएं, संवेदनाएं और मानसिक व्यवहार प्रबल होते हैं। ऐसे लोग काफी संवेदनशील होते हैं। वो दर्द और चोट का अनुभव आसानी से कर पाते हैं, लेकिन इस कारण वो दुख या निराशाजनक अवस्था में भी आसानी से चले जाते हैं। वो इतने भावुक होते हैं कि आसानी से जीवन की सच्चाईयों का सामना नहीं कर पाते। इस तरह के व्यक्तित्व वाले लोग कभी-कभी दिव्यता या किसी शक्ति से जोड़ने के लिए खुद को प्रेरित करते हैं। ऐसे लोग किसी संन्यासी, पादरी या नन का अनुसरण करते हैं और उनके भक्त कहलाते हैं। यह दुनिया ऐसे लोगों के लिए अतार्किक होती है और वो केवल खुद को किसी दिव्यता से ही तार्किक रूप से जोड़ पाते हैं। यह एक ऐसा जोड़ होता है जिसमें वो खुशी तलाश पाते हैं। अगर ऐसे लोग दुनिया से जुड़ते हैं तो उनका अनुभव काफी दर्दभरा होता है। वो दुनिया को एक विनाशकारी अनुभव के तौर पर देखते हैं जिसमें सिर्फ पीड़ा का वास है।

4. मनोवैज्ञानिक दिमाग: चौथे प्रकार का यह दिमाग अंर्तजागृतिमन या मनोवैज्ञानिक है। इस प्रकार के दिमाग में बाह्य वातावरण के बजाय आंतरिक प्रक्रिया में मन, मानस, बुद्धि, चित्त और अहंकार अधिक जागृत रहती हैं। वो लोग जो ऐसे दिमाग के साथ जन्में होते हैं, वो सामान्यत: योगी बन जाते हैं और खुद को उच्च रहस्यवादी और आध्यात्मिक अभ्यास में व्यस्त रखते हैं। आध्यात्मिकता उनके जीवन का आधार बन जाता है।

 

 

 

 

 


अक्सर ये बात महसूस की जाती है कि आकर्षक और स्वस्थ बने रहना काफी मंहगा और कठिन है लेकिन अगर आप खुद के लिए ये सब पाना चाहते हैं तो यह मुश्किल नहीं है। एक वास्तविक सौंदर्य की तलाश जो अनंत तक बनी रहे, आपके जीवन को आसान बना सकती है और वो भी कम कीमतों पर। आयुर्वेद की प्राचीन प्रणालियां हमें वो सारे उपकरण प्रदान करती है जो हमें युवा रखने में मदद कर सकती हैं। नीचे इनमें से तीन पारंपरिक रहस्य बताए गये हैं जिसे आप अपना सकते हैं।

1. सलाद को खाने में शामिल करना एक समस्या: हममें से कई लोग मानते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए ढ़ेर सारा सलाद खाना चाहिए। लेकिन हमें ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए? सलाद कच्ची सब्जियों से बना होता है जो आसानी से नहीं पचाया जा सकता है। हालांकि सलाद प्राकृतिक होते हैं लेकिन वास्तविकता में वो कच्चे और पत्तेदार भी होते हैं और उन्हें ढ़ेर सारे पानी के साथ आसानी से नहीं पचाया जा सकता है। आयुर्वेद हमें सिखलाता है कि पके भोजन को हम आसानी से पचा सकते हैं और शरीर को इसे पचाने के लिए अतिरिक्त काम करने की आवश्यकता नहीं होती है। 


यह बात उन हरी पत्तेदार भोजन जैसे कि सलाद के लिए भी उतना ही सच है क्योंकि इन चीजों के साथ जो बाकी दूसरा भोजन हम खाते हैं, उसमें प्रयुक्त पानी हमारे पाचन तंत्र को नम कर देता है। अगर आप सलाद खाने जा रहे हैं तो इसे भोजन के खाने के बाद सबसे अंत में खाएं। इसे सूप की तरह खाने में शामिल ना करें बल्कि खाना खाने के कुछ देर बाद ही इसे खाएं।

2. नाक के दोनों छिद्र एक जैसे नहीं बनाए गये हैं: क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप सो कर उठें हों और आपकी एक नाक पूरी तरह बंद हो? हो सकता है कि दूसरी नाक के छिद्र से आप ठीक तरह से सांस ले रहे हों लेकिन क्या बंद नाक के साथ भी ऐसा है। आप शायद सोचते हैं कि दोनों नाक के छिद्र एक समान है, ठीक कहा ना? लेकिन आपको बता दूं कि ऐसा नहीं है। आयुर्वेद के अनुसार प्रत्येक नासिका हमारे शरीर और दिमाग के अलग-अलग पहलुओं से संबंधित है। बायां नथुना शीतलता और चिंतनशील ऊर्जा से संबंधित है जबकि दायां नथुना साहस और सौर ऊर्जा से संबंधित है, जिसमें पाचन भी आता है। सुबह जगने के बाद अगर दाईं नासिका बंद हो तो इसका अर्थ है कि हमारा पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा है। ऐसा अक्सर तब होता है जब आप या तो काफी देर रात भोजन करते हैं या सोने से काफी पहले। अगर हम गलत तरीके से खाना खाते हैं तो खाना ठीक से पचता नहीं है और वो विषाक्त हो जाता है। परिणामस्वरूप हमारा वजन बढ़ जाता है या हमारे शरीर की ऊर्जा कम हो जाती है। लगातार अगर हमारा पाचन खराब रहे तो इससे हमारी उम्र भी कम हो जाती है। सुबह उठने के बाद अगर आप दाईं नासिका से सांस नहीं ले पा रहे हैं तो ठोस खाद्य पदार्थ से बचें और इसके बदले तरल पदार्थ लें जैसे कि हल्का गर्म पानी या हर्बल चाय। नाक के खुलने के बाद ही खाना खाएं। जैसे-जैसे आपका पाचन ठीक होता जायेगा, वैसे-वैसे आपकी ऊर्जा भी बढ़ती जायेगी और दिनों दिन आप आकर्षक भी होते जायेंगे।

3. नीम जादूई होता है: क्या आयुर्वेद बढ़ती उम्र को धीमा करने की प्रक्रिया में मदद कर सकता है? पूर्ण रूप से। एक उपाय है जो विशेष रूप से लाभदायक है और वह है नीम का तेल। नीम एक पेड़ है जिसका जन्म भारत उपमहाद्वीप में हुआ और जिसके स्वास्थ्य लाभों की सूची बड़ी लंबी है। लेकिन इनमें से एक विशेष तरीका काफी उपयोगी है जो त्वचा की खूबसूरती बढ़ाता है। इसमें मुहांसों पर काबू पाने के साथ-साथ एक्जिमा और अन्य त्वचा संबंधी बीमारियों पर भी काबू पाने का गुण है। इसका इस्तेमाल कई प्रकार के सौंदर्य प्रसाधन जैसे कि साबुन, फेसियल क्रीम इत्यादि बनाने में किया जाता है। नीम को त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि यह चेहरे के निशान को हल्का करने और त्वचा को नम बनाए रखने में भी मदद करता है। हालांकि तेल के रूप में नीम अधिक प्रभावी है। इसलिये इसके औषधीय गुणों को तेल के रूप में इस्तेमाल किया जाना अधिक आदर्श होगा। खुद का नीम से जुड़ा कोई स्कीन केयर उत्पाद बनाने के लिए 12 बूंद नीम के तेल को 1 औंस नारियल के तेल के साथ मिलाएं। इसकी एक पतली परत अपने चेहरे पर लगाएं जैसे आप किसी क्रीम को लगाते हैं। उम्र को कम करने वाली क्रीम के रूप में नीम का यह सुरक्षित और लाभदायद तरीका है।

जरूरी नहीं कि युवा और आकर्षक रहने के लिए केवल मंहगे उत्पाद या जटिल तरीका या सर्जरी ही अपनाया जा सकता है। जब आप आयुर्वेद को अपनाते हैं तो यह केवल आपके उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को ही धीमा नहीं करता बल्कि आपके अंदर की उन महान खूबसूरतियों को भी सामने लाता है जो आपमें हमेशा से थी।

 

मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थल

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